Nirankari Poem

MATA SAVINDER HARDEV JI K ANMOL VACHAN

* सन्त जहाँ भी जाते हैं अपनी भक्ति की सिखलाई ,        अपनी भक्ति की महक साथ लेकर जाते हैं               उस महक से सरे संस…

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